गुरुवार, 18 अगस्त 2011

वंदे मातरम


रोहित कुमार सिंह
आप वंदे मातरम नारे को जानते हैं. इसी नारे को गा-गाकर देश के दीवानों ने हमें आजादी दिलायी थी. हालांकि आजादी के बाद सांप्रदायिक रंग देकर इसे उपेक्षित कर दिया गया, पर देश पर जैसे ही दूसरे आपातकाल के बादल मंडराने लगे, यह अचूक औजार बन कर सामने आया. पूरा देश वंदे मातरम के नारे व तिरंगे से शकित अर्जित कर रहा है और कांग्रेस की कब्र खोद रहा है. इसके बारे में एक जानकारी यह भी है. सही ही कहा गया है-सच कभी टोकरी के नीचे छिपाया नहीं जा सकता है. सत्य की सदा जीत होती हैऔर जिसका जो हक होता है वह उसे समय आने पर खुद ही मिल जाता है. वंदे मातरम के साथ आज की पीढी सही न्याय कर रही है. देश के तथाकथित बुद्धिजीवियोंको यह मान लेना चाहिए कि वंदे मातरम ही देश की आवाज है, क्रांति की सू़त्रधार है. एक बात यह भी है कि कांग्रेस ने ही उसका उसका हक अपने फायदे के लिए नहीं लेने दिया. उसी कांग्रेस की बात हो रही है जिसके व्याभिचार से त्रस्त होकर देश आज अन्ना हजारे के साथ उसके विरोध में खडा है.

२००३ में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय सर्वेक्षण , जिसमें अब तक के दस सबसे मशहूर गीतों का चयन करने के लिये दुनिया भर से लगभग ७,००० गीतों को चुना गया था, और बी०बी०सी० के अनुसार, १५५ देशों/द्वीप के लोगों ने इसमें मतदान किया था, वन्दे मातरम् शीर्ष के १० गीतों में दूसरे स्थान पर था।
इस गीत की मूल रचना निम्नलिखित है.

(संस्कृत मूल गीत)

वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलय़जशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम् ।।१।।

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम् । वन्दे मातरम् ।।२।।

कोटि-कोटि (सप्तकोटि) कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि (द्विसप्तकोटि) भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केनो माँ एतो बॉले (के बॉले माँ तुमि अबले),
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम् ।।३।।

तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि माँ शक्ति,
हृदय़े तुमि माँ भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम् ।।४।।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम् ।।५।।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्। वन्दे मातरम् ।।६।।>

यह भी जानें.

स्वाधीनता संग्राम में निर्णायक भागीदारी के बावजूद जब राष्ट्र-गान के चयन की बात आयी तो

वंदे मातरम

के स्थान पर सन् १९११ में इंग्लैण्ड से भारत आये जार्ज पंचम् की प्रशस्ति में रवीन्द्र नाथ ठाकुर द्वारा लिखे व गाये गये गीत जण-गण-मण अधिनायक जय हे को वरीयता दी गयी। इसकी वजह यही थी कि कुछ मुसलमानों को ‘वन्दे मातरम्’ गाने पर आपत्ति थी, क्योंकि इस गाने में देवी दुर्गा को राष्ट्र के रूप में देखा गया है। इसके अलावा उनका यह भी मानना था कि यह गीत जिस ‘आनन्द मठ’ उपन्यास से लिया गया है वह मुसलमानों के खिलाफ लिखा गया है। इन आपत्तियों के मद्देनजर सन् १९३७ में कांग्रेस ने इस विवाद पर गहरा चिन्तन किया। जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित समिति जिसमें मौलाना अब्दुल कलाम आजाद भी शामिल थे, ने पाया कि इस गीत के शुरूआती दो पद तो मातृभूमि की प्रशंसा में कहे गए हैं, लेकिन बाद के पदों में हिन्दू देवी-देवताओं का जिक्र होने लगता है; इसलिये यह निर्णय लिया गया कि इस गीत के शुरुआती दो पदों को ही राष्ट्र-गीत के रूप में प्रयुक्त किया जायेगा। इस तरह गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर के जन-गण-मन अधिनायक जय हे को यथावत राष्ट्रगान ही रहने दिया गया और मोहम्मद अल्लामा इकबाल के कौमी तराने सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा के साथ बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित प्रारम्भिक दो पदों का गीत वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत स्वीकृत हुआ।


भारत माता की जय. वंदे मातरम

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